नई दिल्ली । भाईचारा, एकजुटता और संबंधों के एक अनूठे प्रदर्शन के रूप में, पूर्वोत्तर की बहनों ने सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों के जवानों को राखी बांधी, जिनके बटालियनों या दलों की तैनाती जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में की गई है। रक्षाबंधन त्योहार की पूर्व संध्या पर, केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की अनूठी पहल पर आयोजित एक कार्यक्रम में, पूर्वोत्तर के आठ राज्यों, अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम के स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तैनात सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को राखियां, तीन रंग के बैंड और फेस मास्क भेजे गये, जो कि भारत की विभिन्न संस्कृतियों, राज्यों और नागरिकों के बीच अंतर्निहित बंधन को बताता है।
मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर मेरा संसदीय क्षेत्र है और पूर्वोत्तर मेरा आधिकारिक निर्वाचन क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि डोनर मंत्रालय के मंत्री होने के नाते, पूर्वोत्तर क्षेत्र चूंकि मुझे सौंपी गई जिम्मेदारियों का हिस्सा है, इसलिए वे इसको भारत के दो परिधीय क्षेत्रों को आपस में जोड़ने में सक्षम बनाने के एक दुर्लभ अवसर के रूप में देखते हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सैनिकों के लिए पूर्वोत्तर से भेजी गई राखियों के संदर्भ में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह संदेश है कि पूरे देश की बहनें सुरक्षा बलों में तैनात अपने भाइयों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना कर रही हैं, जो उनकी रक्षा के लिए दिन-रात सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम अपने त्योहारों को उस प्रकार से मनाने में सक्षम हैं जिस प्रकार से हम मनाना चाहते हैं, तो यह इसलिए संभव है क्योंकि हमारे भाई हमारे लिए इस बात को सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात जागते रहते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र की महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा मार्च-अप्रैल से ही फेस मास्क का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा, रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर उनके द्वारा लॉकडाउन के बेहद सीमित माहौल में कड़ी मेहनत की गई जिससे कि वे जवानों के लिए फेस मास्क का निर्माण कर सकें। इस कार्यक्रम का समन्वय पूर्वोत्तर भारत के स्वयं सहायता समूहों ने किया, जबकि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर), पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) और पूर्वोत्तर क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन परियोजना (एनईआरसीओआरएमपी) ने इसे समर्थन प्रदान किया। डोनर मंत्रालय के सचिव, इंद्रजीत सिंह, विशेष सचिव, इंदेवर पांडे और विशेष कार्य अधिकारी, प्रशांत कुमार झा भी मौजूद थे।