Wednesday, 19 September 2018, 9:58 PM

धर्म कर्म

जब श्रीराम ने ऐसे करवाई माता कौशल्या को ज्ञान की प्राप्ति

Updated on 19 September, 2018, 14:00
एक दिन माता कौशल्या अपने पुत्र भगवान श्रीराम के पास जाकर बोली, ' हे राम ! तुम मुझे कुछ उपदेश दो, जिससे की मुझे कुछ ज्ञान प्राप्त हो।' माता के वाक्य सुनकर श्रीराम बोले, ' कल प्रात:काल आप गौशाला में जाकर वहां कुछ देर के लिए ठहरें और बछड़ों के... आगे पढ़े

जब भीम ने कराया युधिष्ठिर को समय का ज्ञान

Updated on 19 September, 2018, 13:00
एक बार दरबार खत्म होने पर युधिष्ठिर अपनी भाइयों और पत्नी द्रौपदी के साथ वार्तालाप कर रहे थे। उसी वक्त द्वारपाल ने आकर सूचना दी कि दो अतिथि आपसे मुलाकात करना चाहते हैं। युधिष्ठिर ने उनको कल आने का कहा। यह देखकर भीम वार्तालाप से उठकर चले गए और राजमहल... आगे पढ़े

केवल सीता हरण नहीं, रावण की मौत की वजह बनी उसकी यह 1 कमी

Updated on 19 September, 2018, 6:40
प्राचीन काल से भारत में शिक्षा और दीक्षा पर समान बल दिया गया है। शिक्षा का अर्थ सीखना होता है। ज्ञान जब विनीत भाव से गुरु चरणों में बैठकर ग्रहण किया जाता था और उस ज्ञान को जीवन में उतार लिया जाता है, तब उसे दीक्षा कहा जाता था। रामचरितमानस... आगे पढ़े

अगर पूजा-पाठ, ज्योतिषीय उपाय भी काम नहीं आ रहे हैं, तो यह जरूर पढ़ें

Updated on 18 September, 2018, 13:15
कभी भी भगवान अपने भक्तों को मुसीबत के समय अकेला नहीं छोड़ते। वह किसी न किसी रूप में आकर भक्तों को हर समस्या से बचने का रास्ता दे ही देते हैं। मगर, कई बार ऐसा होता है कि जब हम किसी मुसीबत में होते हैं, तो कई सारे ज्योतिषीय उपाय... आगे पढ़े

गौर नहीं किया होगा आपने, राधा रानी और सीता माता में हैं ये 6 समानताएं

Updated on 18 September, 2018, 7:00
त्रेतायुग में जन्मी माता सीता और उनके बाद द्वापर युग में जन्मी राधा रानी के जीवन में कई समानताएं हैं। दोनों ही दैवीय स्वरूप इस पृथ्वी पर कष्ट भोगते हुए प्रेम और त्याग की मूर्ति के रूप में प्रसिद्ध हुईं। लेकिन क्या कभी आपने गौर किया कि इनके पृथ्वी पर... आगे पढ़े

भगवान कृष्ण ने बताया इसलिए यज्ञ का सही फल नहीं ले पाता मनुष्य

Updated on 17 September, 2018, 9:15
अहं हि सर्वयज्ञानां भोक्ता च प्रभुरेव च| न तु मामभिजानन्ति तत्वेनातश्च्यवन्ति ते|| गीता 9/24|| अर्थ: मैं ही सभी यज्ञों का भोक्ता और स्वामी हूं, परंतु वे मुझे तत्व रूप से नहीं जानते, इसलिए नीचे गिरते हैं । व्याख्या: व्यक्ति अपनी क्षणिक इच्छा पूर्ति के लिए संबंधित देवता को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ... आगे पढ़े

विश्वकर्मा पूजा 2018: शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, जानें कौन हुए पहले विश्वकर्मा

Updated on 17 September, 2018, 6:40
संसार के कार्य में सहयोग देनेवाले, शिल्प कलाधिपति, तकनीकी जगत के भगवान विश्वकर्मा की पूजा का त्योहार हर साल 17 सितंबर को मनाया जाता है। इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा का जन्म माघ शुक्ल त्रयोदशी को हुआ था, इन्हें भगवान शिव का... आगे पढ़े

राधाष्टमी : कृष्णप्रिया राधिका का जन्मोत्सव

Updated on 17 September, 2018, 6:20
जन्माष्टमी श्रीकृष्ण का संदर्भ बिना राधा के पूरा नहीं होता है। राधा और कृष्ण मिलकर प्रेम का वृत्त पूरा करते हैं। हमारी परंपरा में शुद्ध प्रेम के प्रतीक के रूप में राधा-कृष्ण का नाम सबसे ऊपर माना जाता है। भाद्रपद माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधाष्टमी के नाम से मनाया... आगे पढ़े

सिर्फ गणेश जी को ही चढ़ाई जाती है दूर्वा, जानिए क्यों

Updated on 16 September, 2018, 13:30
गणपति को विघ्नहर्ता और ऋद्धि-सिद्धी का स्वामी कहा जाता है। इनका स्मरण, ध्यान, जप, आराधना से कामनाओं की पूर्ति होती है व विघ्नों का विनाश होता है। वे शीघ्र प्रसन्न होने वाले बुद्धि के अधिष्ठाता और साक्षात् प्रणवरूप है। गणेश का मतलब है गणों का स्वामी। गणेशजी ही एक मात्र ऐसे... आगे पढ़े

गणेश पांडाल ने आमंत्रण पत्र में छपवाया मोहर्रम दर्शन

Updated on 16 September, 2018, 10:45
झाबुआ । सांप्रदायिक सौहार्द और सामंजस्य के मामले में झाबुआ का हमेशा से उजला इतिहास रहा है। इसी परंपरा को अब भी यहां निभाया जा रहा है। अपने मुस्लिम भाइयों से भाईचारा निभाते हुए 80 वर्ष से अधिक समय से गणपति स्थापना करते आ रहे सार्वजनिक गणेश मंडल ने आगामी... आगे पढ़े

Santan Saptami Vrat 2018: संतान सप्तमी व्रत की तारीख, विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त

Updated on 16 September, 2018, 6:40
Santan Saptami Vrat 2018: भादो महीने के शुक्ल पक्ष कि सप्तमी को संतान सप्तमी व्रत किया जाता है. इस बार यह व्रत 16 सितंबर 2018 को है. संतान सप्तमी व्रत को भुक्ताभरण संतान सप्तमी व्रत भी कहा जाता है. माएं अपनी संतान की लंबी आयु और उन्नति के लिए यह व्रत... आगे पढ़े

जुए में हारकर जब पांडव वन जाने लगे तो द्रौपदी ने ऐसा क्या कहा, युधिष्ठिर ने मूंद ली आंखें

Updated on 15 September, 2018, 7:00
जिस वक्‍त सभी पांडव द्रौपदी के साथ वन की ओर जा रहे थे उस वक्‍त युधिष्ठिर ने क्रोध के कारण अपनी आंखें मूंद रखी थीं। राजा धृतराष्ट्र ने पांडवों के बारे में विदुर से पूछा तो उन्‍होंने बताया कि युधिष्ठिर इतने क्रोध में हैं कि उनके सामने यदि और इस... आगे पढ़े

इस तरीके से और जल्दी कर सकते हैं ईश्वर के दर्शन

Updated on 15 September, 2018, 6:40
श्री श्री आनन्दमूर्ति के प्रभात संगीत और उनके आध्यात्मिक दर्शन के बीच अटूट संबंध है। उनका दर्शन वेदांत और वैष्णव दर्शन के नजदीक होने के कारण भारतीय भक्ति तत्व परंपरा से मिलता-जुलता है। दूसरे रूप में उनकी धार्मिक काव्य रचना जीवात्मा को परमात्मा के साथ मिलाने का काम करती है,... आगे पढ़े

रावण की मौत के बाद मंदोदरी का क्या हुआ?

Updated on 14 September, 2018, 9:15
रामायण का नाम सुनते ही हर किसी के मन में श्री राम की छवि बन जाती है। इसके साथ ही इसका सारे मुख्य पात्रों को याद किया जाता है, जैसे बजरंगबली, माता सीता, भ्राता लक्ष्मण और सबसे मेन रावण, जिसके बिना रामायण अधूरी मानी जाती है। लेकिन रामायण का एेसा... आगे पढ़े

बड़े काम का है विघ्नहर्ता गणेशजी का चूहा, इस तरह करता है कष्टों को दूर

Updated on 14 September, 2018, 6:40
धर्म के दस लक्षणों में बुद्धि का सर्वाधिक महत्व है। धर्मशास्त्रों में कहा गया है- यस्य बुद्धिर्बलम् तस्य, निर्बुद्धे: तु कुत: बलम्। यानी जिसके पास बुद्धि है, वही बलशाली है। क्योंकि बुद्धि के बिना शारीरिक बल भी महत्वहीन हो जाता है। गौरतलब है कि सनातन संस्कृति में बुद्धि के प्रतीक... आगे पढ़े

इसलिए भी मुबई में गणपति दर्शन के लिए पंडालों में आते हैं बड़े-बड़े सिलेब्रिटी

Updated on 13 September, 2018, 22:30
सदगुरु स्वामी आनन्द जी आंतरिक, मानसिक और शैक्षिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ पर्व है गणेश चतुर्थी। गणपति बौद्धिक संपदा के स्वामी हैं। इस दिन त्राटक और ध्यान के द्वारा उपासना का विशेष महत्व है। इस दिन को लेकर कई अदभुत,अनोखी और विचित्र मान्यताएं भी सामाजिक ताने बाने की तरह प्रचलन में... आगे पढ़े

चतुर्थी का चांद देखने से क्यों लगता है झूठा आरोप, जानें पौराणिक कथा

Updated on 13 September, 2018, 6:40
चतुर्थी के चंद्रमा का दर्शन करना वर्जित है। मान्यता है कि चतुर्थी का चांद देखने से जीवन में कलंक लगा सकता है। भगवान श्री कृष्ण भी इस कलंक से बच नहीं सके थे और उन्हें भी स्यमंतक मणि चुराने के झूठे आरोप का सामना करना पड़ा था। जानते हैं वह... आगे पढ़े

इस एक काम से गणपति पूरी करेंगे आपकी मुराद

Updated on 12 September, 2018, 7:00
जैसे कि सबको पता है कि भगवान गणेश को कईं नामों से जाना जाता है। कोई इन्हें बप्पा कहता है तो कोई विघ्नहर्ता तो कोई इन्हें दुखहर्ता के नाम से पुकारता है। मान्यता हैं कि यह अपने भक्तोंं के सभी दुख-दर्द दूर कर देते हैं। जिस वजह से इन्हें ये... आगे पढ़े

क्या है महाकाल के भस्म रमाने के पीछे का सच?

Updated on 11 September, 2018, 7:00
ज्यादातर लोग उज्जैन के प्राचीन महाकालेश्वर मंदिर के बारे में जानते हीं होंगे। पूरे देश में इस मंदिर की भस्म आरती चर्चा का विषय बनी हुई है। मान्यताओं के अनुसार महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का बहुत ही सुन्दर रूप से वर्णन किया गया है।... आगे पढ़े

जानिए भगवान गणेश की उत्‍पत्ति के पीछे यह है रोचक कथा

Updated on 10 September, 2018, 7:40
भगवान गणेश की उत्‍पत्ति को लेकर पुराणों में कई प्रकार की कथाएं बताई गई हैं। कहीं बताया गया है कि माता पार्वती के उबटन से गणेशजी बने तो कहीं कहा गया है कि भगवान शिव ने उन्‍हें गज रूप दिया है। आइए जानते हैं कि कैसे हुई बालक गणेश का... आगे पढ़े

गणेश चतुर्थी 2018 : लंबोदर को इन मंत्रों से करें प्रसन्न, पूरी होगी हर मनोकामना

Updated on 10 September, 2018, 6:40
नई दिल्ली: भगवान गजाजन को देवताओं में प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और सुखकर्ता कहा जाता है. यही नहीं वो रिद्धि-सिद्धि के दाता भी हैँ. वैसे तो धार्मिक ग्रंथों में भगवान गजानन को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए अनेकों स्तुति, मंत्रों का वर्णन हैं. गणेश महापुराण, गणेश सहस्त्रनाम स्त्रोत... आगे पढ़े

पिता की शादी कराने के लिए आजीवन कुंवारे रह गए, हुआ खुद का ऐसा अंजाम

Updated on 7 September, 2018, 7:00
महाभारत के महायोद्धाओं में प्रमुख भीष्म पितामह देवी गंगा और राजा शांतनु के पुत्र थे। स्वर्गलोक में ब्रह्मा जी द्वारा दिए गए एक शाप के कारण देवी गंगा और शांतनु को पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा था। इनकी आठवीं संतान थे देवव्रत, जो आगे चलकर भीष्म और फिर भीष्म से... आगे पढ़े

शून्य हो जाना ही ध्यान है - ओशो

Updated on 6 September, 2018, 12:30
ओशो  ध्यान का कोई अनुभव नहीं होता। ध्यान अनुभव है भी नहीं, जब सब अनुभव समाप्त हो जाते हैं, तब जो शेष रह जाता है उसका नाम ध्यान है। ध्यान के न तो उथले अनुभव होते हैं न गहरे अनुभव होते हैं। ध्यान अनुभव का नाम ही नहीं है। जहां तक... आगे पढ़े

कैलास मानसरोवर के इन 7 रहस्यों को कोई जान नहीं पाया, कौन बजाता है यहां मृदंग

Updated on 6 September, 2018, 7:20
दुनिया के सबसे ऊंचे शिवधाम कैलास मानसरोवर की यात्रा इन दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कर रहे हैं और इन्होंने अपनी इस यात्रा को लेकर ट्वीट किया है और बताया है कि कैलास आने का सौभाग्य उसे ही मिलता है जिसे कैलास बुलाते हैं। राहुल गांधी ने यहां स्थित मानसरोवर... आगे पढ़े

बिना कामुकता के प्रेम करना सीखना है तो इनसे सीखें

Updated on 6 September, 2018, 6:20
भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र अत्यंत दिव्य है। हर कोई उनकी ओर खिंचा चला जाता है। उनके जीवन की प्रत्येक लीला में विलक्षणता दिखाई देती है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव सामाजिक समता का एक उदाहरण है। श्रीकृष्ण ने कारागार में जन्म लिया और गांव में खेलते हुए उनका बचपन व्यतीत हुआ। इस प्रकार... आगे पढ़े

जब गणपति ने चुराया ऋषि गौतम की रसोई से भोजन

Updated on 5 September, 2018, 7:00
जैसे कि सब जानते हैं कि भगवान गणेश बचपन में बहुत नटखट थे। उनकी बाल लीलाओं से मां पार्वती हमेशा परेशान रहती है और कभी-कभी तो क्रोधित होकर उन्हें दंड भी दे देती थी। तो आइए उनके बचपन से जुड़ी एेसी ही एक कथा के बारे में जानते हैं। एक बार... आगे पढ़े

काशी हिंदू विश्वविद्यालय बनवाने में इस राजा ने की थी मदनमोहन मालवीय की मदद

Updated on 4 September, 2018, 7:00
एक बार की बात है, बीकानेर नरेश का दरबार लगा हुआ था। राजद्वार पर ब्राह्मणों की एक बड़ी पंक्ति खड़ी थी। उसी पंक्ति में महामना मदनमोहन मालवीय एक नारियल व कलावा लिए खड़े थे। उनके आगे मौजूद प्रत्येक ब्राह्मण नरेश की कलाई में कलावा बांधता, परिचय देता और फिर दक्षिणा... आगे पढ़े

देशभर में जन्माष्टमी की धूम, चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच भव्य झांकियों और माखनचोर की लीलाओं का मंचन

Updated on 3 September, 2018, 10:20
नई दिल्ली, पूरे देश में आज जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर देशभर में मंदिरों को सजाया गया है तथा झांकियां बनाई गईं और साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। हालांकि उत्कतर भारत में कई स्थानों पर... आगे पढ़े

श्रीकृष्ण जन्माष्टमीः जानें क्या कहते हैं कान्हा के बारे में जाने-माने कथावचक

Updated on 3 September, 2018, 9:15
अथ श्री कथावाचक कथा कृष्ण का जीवन और मार्गदर्शन आज भी उतने ही उपयोगी हैं जितने द्वापर में थे। यही कारण है कि कन्हैया की कथाओं को सुनाने की परंपरा बदस्तूर जारी है। हां, कुछ बदलाव जरूर हुए हैं। अब कथावाचन में बिजनेस का पुट भी आ गया है। कथावाचकों के... आगे पढ़े

रहस्यों से भरा श्रीकृष्ण का जीवन, इसलिए कहलाते हैं पूर्ण पुरुष

Updated on 3 September, 2018, 7:00
भगवान श्रीकृष्ण का बचपन और किशोरावस्था गोकुल के ग्वालबालों को संगठित व शिक्षित करने तथा उनमें धार्मिक व सांस्कृतिक प्रतिमानों को स्थापित करने में बीता। इसी समय उन्होंने अनेक उत्पाती व अनाचारी असुरों का संहार भी किया। कंस को मारने के पश्चात् जब वे सिंहासनारूढ़ हुए, तब उनके अल्हड़ यौवन... आगे पढ़े